Home उत्तर प्रदेश लोगों की धारणा है, गरीबों को भोजन कराने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है

लोगों की धारणा है, गरीबों को भोजन कराने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है

by Shrinews24
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लोगों की धारणा है, गरीबों को भोजन कराने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है

दरिद्र नारायण सेवा समिति के आश्रम में जरूरतमंदों के बीच जाकर मनाई पुण्यतिथि

राहुल कुमार गुप्ता
दीपक यादव
कोच जालौन

कोंच सनातन संस्कृति में लोगों की धारणा है कि गरीबों असहायों दिव्यांगों और समाज के ऐसे लोगों जिनके पास अपना जीवन यापन करने का कोई जरिया नहीं है, को भोजन कराने से पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है। इसी अवधारणा के साथ यहां जरूरतमंदों को नित्य प्रति भोजन कराने वाली सामाजिक संस्था दरिद्र नारायण सेवा समिति के आश्रम में लोग जाकर गरीबों को भोजन कराने का पुण्य लाभ अर्जित करते रहते हैं। इतना ही नहीं, बच्चों के जन्मदिन वैवाहिक बर्षग्रंथि या इस तरह के अन्य अवसरों पर भी लोग इन असहायों के बीच पहुंच कर अपनी खुशियों के बहाने उनकी भोजन, वस्त्र या अन्य जरूरतों को पूरा कर सुख का अनुभव करते हैं। शुक्रवार को भूतपूर्व मजिस्ट्रेट स्व. भगवान दास शुक्ला की पत्नी स्व. शांति देवी की पहली बरसी पर उनके पुत्रों हरीश शुक्ला, डॉ. सतीश, मुनीशचंद्र, दिवीश, पुत्रवधुओं मंजू, रेखा, अश्विनी, आयुष, सारांश आदि के साथ आश्रम जाकर जरूरतमंदों को भोजन कराया। स्व. फूलारानी यादव की भी पुण्यतिथि पर उनके परिजनों और शुभचिंतकों राकेश यादव, राजू निरंजन, सचिन सोनी, महेंद्र यादव आदि ने जरूरतमंदों को अपने हाथों से परोस कर भोजन कराया। गरीबों ने भी दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। संस्था के प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह, श्रीकांत गुप्ता ने आगंतुकों का स्वागत कर संस्था के उद्देश्यों के बाबत बताया। राजीव अग्रवाल ने आभार जताया।

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