Home उत्तर प्रदेश इप्टा और प्रलेस ने दुष्यंत को किया याद, अली जावेद को दी श्रद्धांजलि

इप्टा और प्रलेस ने दुष्यंत को किया याद, अली जावेद को दी श्रद्धांजलि

by Shrinews24
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इप्टा और प्रलेस ने दुष्यंत को किया याद, अली जावेद को दी श्रद्धांजलि

राहुल कुमार गुप्ता
रिंकू गुप्ता
कोच जालौन

कोंच भारतीय जन नाट्य संघ इप्टा इकाई कोंच एवं प्रगतिशील लेखक संघ प्रलेस इकाई कोंच के सँयुक्त तत्वावधान में दुष्यंत कुमार के जन्म दिन पर याद-ए-दुष्यंत कार्यक्रम के तहत याद किया गया। इसके साथ ही उर्दू के प्रसिद्ध आलो चक और प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ० अली जावेद के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई इप्टा/ प्रलेस के प्रांतीय सचिव एवं कोंच/इप्टा प्रलेस के संस्थापक अध्यक्ष डॉ० मुहम्मद नईम बॉबी ने प्रलेस के कार्यकारी अध्यक्ष अली जावेद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जावेद साहब हरदिल अजीज शख्स थे।वे उच्च कोटि के विद्वान और कुशल वक्ता थे। उर्दू के साथ ही हिंदी और अंग्रेजी साहित्य में भी उनका गहन अध्ययन था
उन्होंने कहा कि दुष्यंत कुमार के शेर सामाजिक और राजनीतिक मंचों पर समान रूप से पढ़े जाते हैं ,लेकिन व्यवस्था में सुधार लाना ही दुष्यंत की गजलों की प्रासंगि कता हैं। दुष्यंत कुमार की भांति ही अपनी रचनाओं को रचने वाले साहित्यकार सुनिलकान्त तिवारी ने कहा कि दुष्यंत ने हिंदी गजल को एक नई पहचान दी हिंदी साहित्य में अपने इस योगदान के लिए हमेशा याद किये जाते रहेंगे। साये में धूप आदि कृति उनकी आज भी साहित्य पाठकों के दिलों को छू लेने का कार्य करती है।
अध्यक्षता कर रहे इप्टा कोंच के सरंक्षक अनिल कुमार वैद एडवोकेट ने कहा कि उर्दू के प्रसिद्ध आलोचक का डॉ० अली जावेद का जाना प्रगति शील आंदोलन के लिए बड़ा नुकसान है उन्होंने कहा कि दुष्यंत कुमार की गजलों में एक इंक लाब का भाव था उन्होंने व्यवस्था के खिलाफ कलम को हथियार बना या और भ्रष्ट तंत्र के विरुद्ध लगातार लिखते रहे उनकी गजलें और शेर हर दौर में प्रासंगिक है नवोदित रचनाकार रौली मिश्रा ने पढ़ा कि इस देश में बहती मां गंगा है,इस देश में सभी का मन खुशियों से रंगा है , यह वीरों की शान है। यही भारत की पहचान है
इंस्टाग्राम पर अनकहे अल्फ़ाज़ के नाम से अपने जज्बातों को लिखने वाली रचनाकार निहारिका लखेरा ने दुष्यंत कुमार को श्रद्धां जलि अर्पित करते हुए कहा कि दुष्यंत कुमार की गजलों में उनके समय की परिस्थितियों का वर्णन मिलता है। वे केवल प्रेम की बात नहीं करते, अपितु अपने आस पास के परिवेश को अपनी गजल का विषय बनाते है युवा प्रतिभा शालिनी गुप्ता ने प्रो० अली जावेद को श्रद्धां जलि अर्पित करते हुए कहा कि डा.जावेद के साहित्यिक व्यक्तित्व में एक ख़ास तरह का एक्टिविज़्म था। सही मायनों में इंकलाबी डॉ.जावेद गलत के खिलाफ लड़ते थे। इस अवसर पर संचालन इप्टा सचिव पारसमणि अग्रवाल ने किया

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