Home उत्तर प्रदेश नोएडा के बाद गाजियाबाद में सुपरटेक एस्टेट और जीडीए की मिलिभगत से सरकार को करोड़ों का चूना

नोएडा के बाद गाजियाबाद में सुपरटेक एस्टेट और जीडीए की मिलिभगत से सरकार को करोड़ों का चूना

by Shrinews24
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नोएडा के बाद गाजियाबाद में सुपरटेक एस्टेट और जीडीए की मिलिभगत से सरकार को करोड़ों का चूना
गाज़ियाबाद के वैशाली सेक्टर 9 में सुपरटेक एस्टेट पर आखिर जीडीए क्यों मेहरबान है क्या कारण है की अवैध निर्माण को लेकर हाईकोर्ट के फैसले बावजूद आज तक अवैध निर्माण को लेकर कोई ठोस करवाई नही हुई अगर करवाई हुई है तो सिर्फ कागजों में खाना पूर्ति हुआ…
गौरतलब है की सुपरटेक एस्टेट को जीडीए की तरफ से 247 फ्लैट बनाने की परिमिशन मिली थी जबकि भू-माफियाओं के द्वारा 357 फ्लैट बना दिये गए बहरहाल करोड़ों रुपये की जमीन पर सुपरटेक एस्टेट का कब्जा है।
ग्रीन बेल्ट में आने वाले जमीन पर भी सुपरटेक एस्टेट का अवैध कब्जा है जिसपर भू-माफियाओं के द्वारा पार्किंग काटकर बेची गयी है जबकि बिल्डर को सरकारी जमीन बेचने का कोई अधिकार नही है ।
जीडीए के उपाध्यक्ष से इस संदर्भ में बात की गई तो उन्होंने पूरे प्रकरण को देखने का बहाना कर दिया , जीडीए के ओएसडी सुशील चौबे का कहना है करवाई की जा रही है इस संदर्भ में गाजियाबाद प्राधिकरण को नोटिस पहले भी दिए गए थे लेकिन उन पर अभी तक कोई संज्ञान नही लिया गया
हमेशा की तरह रटा रटाया जवाब प्राधिकरण की यही है फिर से करवाई की जाएगी जो अवैध दुकान या फ्लैट है उन पर समय समय पर ध्वस्तीकरण से लेकर सीलिंग तक की करवाई करता रहा है और आगे भी करता रहेगा।
सनद रहे की हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार सुपरटेक एस्टेट वैशाली में 110 फ्लैट मालिकों को RWA के चुनाव में वोटिंग से वंचित करने के बाबजूद बिल्डर के द्वारा बनाई गई सोसाइटी के चुनाव में सबको गैर कानूनी रुप से वोटिंग अधिकार दिए गए है इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2015/16 में अपने फैसले में 110 फ्लैट के आवंटियों को अवैध घोषित कर दिए थे
गौरतलब है की सुपरटेक एस्टेट के द्वारा प्रहलादगाडी की जमीन पर जो नक्सा पास कराया गया था वह 247 फ्लैट का था फिर 357 कैसे बन गए उस वक्त जीडीए के अधिकारी कुम्भकर्ण की नींद में सो रहे थे ।
एक बार फिर अक्टूबर माह में RWA के चुनाव के लिए कमर कस कर रहे मौजूदा हालात में देखने वाली बात होगी क्या रजिस्टार महोदय माननीय हाईकोर्ट के फैसले की मर्यादा को रखते है या अपना ही कानून चलाते है वैसे भी लोगों को कानून के साथ खेलने की पुरानी आदत है । जीडीए के अधिकारी कानों में तेल डालकर आराम से सो रहे है जबकि पूरे जनपद में हूं माफियाओं के द्वारा अवैध निर्माण जोरों पर है जेई , सुपरवाइजर, अधिकारियगण बेखौफ होकर अपनी अपनी जेब भरने में लगे हुए है ।
मेरठ से समाजसेवी ओमप्रकाश रतूड़ी, विनीत जैन व उनकी टीम के द्वारा इसी संदर्भ में रजिस्टार अरविंद कुमार से मुलाकात की तो उन्होंने बताया जल्द ही करवाई की जाएगी और जो लोग चुनाव में सम्लित नही हो सकते उनको जबरन वोटिंग नही करने दी जाएगी । सुपरटेक एस्टेट की कुछ दुकानों और जगह पर जीडीए के द्वारा करवाई की गई जिसमे कुछ दुकानों को सील किया गया लेकिन बेहद अफसोस है की प्राधिकरण की मिलीभगत से सील लगी हुई दुकान आज भी खुली हैं। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के द्वारा 30/06/2015 को प्रश्नगत सूची जारी की जिसमे 247 को ही वोटिंग का अधिकार दिया गया है जबकि सुपरटेक एस्टेट के द्वारा 357 फ्लैट बनाये गए जिसमे 110 फ्लैट अवैध है इसके अतिरिक्त सुपरटेक एस्टेट के द्वारा ग्रीन बेल्ट पर कब्जा किया हुआ है । प्रहलादगडी गांव के खसरा संख्या 299, 300, 302 जिसका क्षेत्रफल 16265 वर्गमीटर है । फ्लैट खरीदने वाले वायर्स ने फ्लैट को सुपरटेक एस्टेट के नियमानुसार भुगतान कर रजिस्ट्री करवाई थी । अपार्टमेंट एक्ट 2010 की धारा 4 उपधारा 5 के अनुसार जिन फ्लैटों को स्वीकृति के बिना बनाया गया है उनको मताधिकार का अधिकार नही है । गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के कारण ही अवैध निर्माण सम्भव हो पाया उस वक्त तय मानक के अनुसार सुपरटेक एस्टेट को काम करने दिया गया होता तो आज अवैध कब्जा नही होता । देखने वाली बात ये होगी क्या गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण कुम्भकर्ण की नींद से जागता है या नही ।

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