Home उत्तर प्रदेश जेल अधिकारियों की घूसखोरी के चलते यातना ग्रह मे बदली जिला जेल

जेल अधिकारियों की घूसखोरी के चलते यातना ग्रह मे बदली जिला जेल

by Shrinews24
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जेल अधिकारियों की घूसखोरी के चलते यातना ग्रह मे बदली जिला जेल

विचाराधीन बंदी नीरज से 35 हजार रूपये की जेल प्रशासन ने की मांग

बंदी की पत्नी ने शासन और उच्चाधिकारियों एवं प्रेस को भेजी शिकायत

राहुल कुमार गुप्ता
मोहम्मद इरफ़ान
उरई जालौन

उरई पत्नी ने आरोप लगाते हुये बताया कि अगर पति को बचाना है तो 35 हजार दे दो अन्यथा जान से मार दिया जायेगा यह सुनते ही पत्नी ने जेल के उच्च अधिकारियों से पति को सुरक्षित करने की मांग करते हुये कई जगह प्रार्थना पत्र दिये।
मीनू पत्नी नीरज उर्फ बब्बू निवासी ग्राम सतोह थाना एट ने आरोप लगाया कि मोबाइल नंबर 8081232962, 915162257400 से मेरे पति द्वारा फोन कराया गया कि 35 हजार जमा कराओ नहीं तो मुझे जान से मार दिया जाएगा। यह सुनते ही प्रार्थिनी ने आईजी कारागार व महिला आयोग समेत कई जगह प्रार्थना पत्र देते हुये अपने पति की सुरक्षा की मांग की। इतना ही नहीं पत्नी ने जब यह बात मौजूदा जेल प्रशासन से कही तो उन्होंने यह कहकर मामले को टाल दिया की जेल में नेतागिरी करना उचित नहीं है। इतना ही नहीं अब पति बब्बू उर्फ नीरज पुत्र ओम प्रकाश पटेल निवासी ग्राम सतोह थाना एट तहसील कोंच जिला जालौन जोकि मुकदमा अपराध संख्या 399/2021 सरकार बनाम एवं आदि धारा 364 भारतीय दंड संहिता थाना कोतवाली उरई के प्रकरण में जिला कारागार में निरुद्ध है। प्रार्थिनी मीनू ने आरोप लगाया है कि पति से जेल अधिकारी द्वारा 35 हजार की अनैतिक मांग की जा रही है और न देने पर प्रताड़ित किया जा रहा है हालांकि जेल में इस तरह की सूचनाएं पूर्व से आ रही हैं जो कैदी छूटते हैं वह जेल का जब वर्णन बताते हैं तो समझ में आता है कि जेल में कितनी पारदर्शिता चल रही है। सबसे मजे की बात है कि जेल का निरीक्षण होता है और समय-समय पर जेल प्रशासन को सूचित किया जाता है लेकिन यह गोरखधंधा आज तक बंद नहीं हुआ है। अगर बंद हो गया होता तो मीनू पत्नी नीरज इस तरह के आरोप नहीं लगाते। आरोप लगे हैं तो फिर कहीं ना कहीं कोई बात जरूर है क्योंकि जब तक आग नहीं लगती है तब तक धुंआ नहीं होता है और जिसकी आंच अब योगी गृह मंत्रालय तक पहुंच गई है हालांकि यह एक जांच का विषय है जांच के उपरांत ही यह सिद्ध हो पायेगा कि जो फोन नंबर बताए जा रहे हैं उनके द्वारा पति से फोन कराया गया या फिर मिथ्या के रूप में आरोप लगाए जा रहे हैं।इस मामले में सुनीत कुमार जेलर जिला कारागार से वार्ता की तो उन्होंने लगाए गये आरोपों का खंडन करते हुये बताया कि इस तरह की कोई भी मांग जेल प्रशासन द्वारा नहीं की गई है। वहीं डिप्टी जेलर पुष्पेंद्र ने भी इसमें कहा कि इस मामले में जेल के अंदर कहीं कोई वार्ता नहीं हुई है लेकिन जो नंबर दर्शाए गये हैं और अगर उन नंबरों से बात हुई है तो इससे जेल प्रशासन की समस्याएं बढ़ सकते हैं और जेल में 35 हजार मांगने का जो मामला सामने आया है उससे कहीं ना कहीं उच्च अधिकारियों को जेल की वास्तविकता का अहसास निश्चित हो गया होगा। खासी बदनाम हो चुकी है उरई जेल, जिम्मेदार अधिकारियों की अवैध बसूली का गढ़ बन चुकी है। इनकी घूसखोरी नीतियों के चलते जेल की चाहर दीवारी के अंदर हत्या जैसी बड़ी बड़ी अनेक घटनाएं पूर्व मे घटित हो चुकी है.

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