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पशुपालन हेतु पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी

by Shrinews24
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पशुपालन हेतु पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी

श्रीन्यूज़24
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लखीमपुर खीरी:-किसान भाईयों नमस्कार।।
ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में दूध की आवश्यकता की पूर्ति के लिए आमतौर पर किसान भाई गाय तथा भैंस पर ही निर्भर रहते है। कई बार अच्छी भैंस खरीद कर लाने के बाद भी हमे अच्छा दूध का उत्पादन नही मिल पाता है या कई बार भैंस दूध मे रहने के बाद भी समय से गर्म नही होती है जिस कारण से किसान भाईयों को आर्थिक हानि होती है।इन सब बातो को ध्यान मे रख कर आज हम आप लोगों के भैंस पालन की जरूरी बातें बतायेंगे जिससे आपकी आय बढे तथा पशु भी स्वस्थ रहे।
भैंस पालन

अच्छी नस्ल और खान-पान का चुनाव

सबसे पहले भैंस पालन के लिए अच्छी नस्ल की भैंस का होना बेहद जरूरी है। पशुपालकों को भैंस पालन हेतु पूरी जानकारी और उसकी अलग-अलग प्रजातियों की जानकारी होना चाहिए। इसके लिए आप मुर्रा भैंस को चुन सकते है। इसके अलावा आपको उनके पालन हेतु अच्छी तरह से संतुलित आहार होना भी बेहद जरूरी है इसकी पूरी और सटीक जानकारी होना चाहिए।  पशुपालकों को चाहिए कि वह पशुओं के लिए एक बेहतर चारा तैयार करें, इसमें दाना की लगभग 35 प्रतिशत मात्रा होना चाहिए. इसके अलावा खली (सरसों की खल, मूंगफली की खल, अलसी की खल, बिनौला की खल) की मात्रा लगभग 30 किलो होनी चाहिए। इनमें से कोई भी खली को आप मिला सकते है। इसके अलावा गेहूँ का चोकर या चावल की पालिका भी 30 किलो प्रयोग करें। 2 किलो खाने वाला नमक तथा 3 किलो खनिज मिश्रण पाउडर मिला कर राशन की मात्रा को 100 किलो बना लें। अब इस राशन को दूध के अनुसार प्रति 2.5 किलो दूध पर 1 किलो राशन जानवर को उपलब्ध करायें।इसके अलावा एक से डेढ़ किलो राशन पशु के स्वास्थय के लिए दें। इस प्रकार आपका पशु दूध व स्वास्थय दोनों हिसाब से अच्छा हो जायेगा।

भैंस हर साल बच्चा दें  

अगर भैंस ने हर साल बच्चा नहीं दिया तो भैंस पर आने वाला रोजाना सवा सौ रूपये का खर्चा आप नहीं निकाल सकते है। इसीलिए भैंस पालक इस बात को ध्यान रखें और अगर जरूरत पडती है तो भैंस का इलाज भी नियमित रूप से डॉक्टर से करवाएं।

भैंसों के लिए आरामदायक बाड़ा

भैंस पालन के लिए सबसे जरूरी बात है कि उनका रख रखाव साफ सुथरा हो। उनके लिए आरामदायक बाड़ा बनाया जाना चाहिए। बाड़ा ऐसा हो जो भैंस को सर्दी, गर्मी, बरसात से बचा सकें। बाड़ें में कच्चा फर्श हो लेकिन वह फिसलन भरा नहीं होना चाहिए। बाड़ें में सीलन न हो और वह हवादार हो। पशुओं के लिए साफ पानी पीने के लिए रखना चाहिए। अगर पशुओं को आराम मिलेगा तो उनका दूध उत्पादन उतना ही बेहतर होगा।

भैंस की नस्लें

भैंस प्रमुख दुधारू पशु है इसकी अपनी भी कई तरह की प्रजाति है तो आइए जानते है कि यह नस्लें कौन-कौन सी हैं।

मुर्रा
 यह दूध देने वाली सबसे उत्तम भैंस होती है। भारत और अन्य देशों में भी इसके बीज का कृत्रिम गर्भाधान में उपयोग किया जाता है। यह भैंस प्रतिदिन 10-20 लीटर दूध दे देती है। इसके दूध में चिकनाई की मात्रा गाय के दूध से दुगनी होती है। इसके दूध का इस्तेमाल दही, दूध, मठा, लस्सी आदि में होता है।

भदावरी भैंस

यह ज्यादातर उत्तर भारत के कई इलाकों में देखी जा सकती है। इसके अलावा यह मथुरा, आगरा, इटावा आदि जगह पर आपको देखने को मिल सकती है। इसके दूध में 14 से 18 प्रतिशत तक फैट शामिल होता है।

मेहसाना भैंस

यह भैंसएक ब्यांत में 1200 से 1500 ली दूध देती है. यह गुजरात के मेहसाणा जिले में पाई जाती है। यह भैंसे काफी बेहतर होते है, इसमें प्रजनन की कोई भी समस्या नहीं होती है। इसको मुर्रा भैंस से क्रांस करवा करवा कर दूध उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है।

जाफरावादी भैंस

यह भैंस मुख्य रूप से गुजरात राज्य में मिलती है। इस भैंस का सिर काफी भारी होता है। इसके सींग नीचे की ओर झुके हुए होते है। यह शरीर में भी काफी भारी होती है। इस भैंस के दूध में काफी मात्रा में वसा पाई जाती है

भैंस पालन हेतु आहार की विशेषताएं

1 भैंस के लिए आहार बेहद ही संतुलित होना चाहिए और इसके लिए दाना मिश्रण में प्रोटीन और ऊर्जा के स्त्रोतों एवं खनिज लवणों का पूरी तरह से समावेश होना चाहिए।
2 आहार पूरी तरह से पौष्टिक और स्वादिष्ट होना चाहिए और इसमें कोई दुर्गंध नहीं आनी चाहिए।
3 दाना मिश्रण में अधिक से अधिक प्रकार के दाने और खलों को मिलाना चाहिए।
4 आहार पूरी तरह से सुपाच्य होना चाहिए, किसी भी रूप में कब्ज करने वाले या दस्त करने वाले चारे को पशु को नहीं खिलाना चाहिए।
5 भैंस को पूरा भरपेट खाना खिलाना चाहिए। उसका पेट काफी बड़ा होता है, उसको पूरा पेट भरने पर ही संतुष्टि मिलती है। यदि भैंस का पेट खाली रह जाता है तो वह मिट्टी, चिथड़े और गंदी चीजें खाना शुरू कर देती है।
6 भैंस के चारे में हरा चारा अधिक मात्रा में होना चाहिए ताकि वह पौष्टिक रहें।

7 भैंस पालन के चारे में अचानक बदलाव न करें, यदि कोई भी बदलाव करना है तो पहले वाले आहार के साथ मिलाकर उसमें धीरे-धीरे बदलाव करें।
8 भैंस को ऐसे समय पर ही खाना खिलाएं जिससे कि वह लंबे समय तक भूखी न रहें यानि कि उसके खाने का एक नियत समय तय रखें और आहार में बार-बार बदलाव न करें।

भैंस के लिए उपयुक्त चारा

भैंस के लिए हम दो तरह से आहार को बांट सकते है जो कि काफी फायदेमंद होता है. सबसे पहले चारा और दाना
चारे में रेशेयुक्त तत्वों की मात्रा शुष्क भार के आधार पर 18 प्रतिशत से अधिक होती है। पचनीय तत्वों की मात्रा 60 प्रतिशत से कम होती है।
सूखा चारा चारे में नमी की मात्रा यदि 10-12 प्रतिशत से कम है तो यह सूखे चारे की श्रेणी में आता है। इसमें गेहूं का भूसा, धान का पुआल, ज्वार, बाजरा और मक्का, कड़वी आदि है। इनकी गणना घटिया चारा के रूप में होती है जो कि केवल पेट भरने का काम करता है।
हरा चारा यदि हरे चारे मे पानी की मात्रा  80 प्रतिशत हो तो इसे हरा/रसीला चारा कहते हैं। पशुओं के लिए यह हरा चारा दो प्रकार का होता है दलहनी तथा बिना दाल वाला। दलहनी चारे में बरसीम, रिजका, ग्वार, लोबियाआदि आते हैं। दलहनी चारे में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। अत: ये अत्याधिक पौष्टिक तथा उत्तम गुणवत्तावाले होते हैं। बिना दाल वाले चारे में ज्वार, बाजरा, मक्का, जर्इ, अगोला तथा हरी घास आदि आते हैं। दलहनी चारे की अपेक्षा इनमें प्रोटीन की मात्रा कम होती है। यदि इस प्रकार से आप भैंस पालन करेंगे तो निश्चित ही आप अपना पशु से लाभ पा सकते है।
अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र के अध्यक्ष या पशु वैज्ञानिक से सम्पर्क करें।
डा नगेन्द्र कुमार त्रिपाठी
वैज्ञानिक पशुपालन

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