Home उत्तर प्रदेश जायद में मूंगफली की वैज्ञानिक खेती कर किसान बढ़ाये अपनी आय -कृषि विज्ञान केन्द्र जमुनाबाद

जायद में मूंगफली की वैज्ञानिक खेती कर किसान बढ़ाये अपनी आय -कृषि विज्ञान केन्द्र जमुनाबाद

by Shrinews24
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जायद में मूंगफली की वैज्ञानिक खेती कर किसान बढ़ाये अपनी आय -कृषि विज्ञान केन्द्र जमुनाबाद

अलोक कुमार वर्मा
श्रीन्यूज़24
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लखीमपुर-खीरी-:किसान भाईयो नमस्कार।।आज हम आपको जायद मूंगफली की खेती के बारे में बतायेंगे।

जायद में कैसे करें मूंगफली की खेती

मूंगफली खरीफ और जायद दोनों मौसम की फसल है, मूंगफली की फसल हवा और बारिश से मिट्टी कटने से बचाती है। खरीफ की अपेक्षा जायद में कीट और बीमारियों का प्रकोप कम होता है। प्रदेश में यह झांसी, हरदोई, सीतापुर, खीरी, उन्नाव, बरेली, बदायूं, एटा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, मुरादाबाद, और सहारनपुर के अधिक क्षेत्रफल में उगाई जाती हैI मूंगफली को गेहूं कटने के बाद खेत खाली होने की दशा में बुवाई की जाती हैं।

मूंगफली के साथ दूसरी फसले भी लगा सकते हैं, इससे जमीन की मात्रा संतुलित रहती है।” इसके लिए शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है, मूंगफली की खेती के लिए दोमट बलुई, या हल्की दोमट भूमि अच्छी रहती है, जायद में मूंगफली की फसल के लिए भारी दोमट भूमि का चुनाव नहीं करना चाहिएI यह आलू, मटर, सरसो और गेहूं की कटाई के बाद खाली भूमि में की जा सकती है।
प्रजातियां
जायद के लिए जो स्वीकृत प्रजातियां है- डीएच-86, आईसीजीएस-44, आईसीजीएस-1, आर-9251, टीजी37, आर-8808

खेत की तैयारी

जायद में मूंगफली की खेती हेतु खेत की तैयारी अच्छी तरह करनी चाहिएI खेत की एक गहरी जुताई के बाद दो-तीन जुताई देशी हल या कल्टीवेटर से करके भुरभुरा बना लेना चाहिएI जायद में आखिरी जुताई के बाद पाटा लगा कर खेत को समतल बना लेना चाहिएI जिससे की पानी लगाने में सुविधा रहे और सभी जगह पानी सफलता से लगाया जा सके।

बीज शोधन तथा बुवाई

जायद में बुवाई मार्च से अप्रैल तक की जा सकती है, जिससे की फसल अच्छी पैदावार दे सकेI बुवाई लाइनों में करना चाहिए, लाइन से लाइन की दूरी 25 से 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 8 से 10 सेमी रखनी चाहिए। जायद की फसल में 95-100 किग्रा प्रति हेक्टेयर बीज बुवाई में लगता हैं बोने से पहले बीज को थीरम दो ग्राम और एक ग्राम 50 प्रतिशत कार्बेन्डाजिम के मिश्रण को दो ग्राम प्रति किग्रा बीज की दर से शोधित करना चाहिएI इस शोधन के पांच-छह घण्टे बाद बोने से पहले बीज को मूंगफली के राइजोबियम कल्चर से भी उपचारित करना चाहिए।

सिंचाई

जायद की फसल में चार-पांच सिंचाई करना चाहिए। पहली सिंचाई जमाव पूर्ण होने पर और सूखी गुड़ाई के 20 दिन बाद दूसरी सिंचाई 35 दिन बाद तीसरी सिंचाई 50 से 55 दिन बाद साथ ही हर समय नमीं रहने के लिए गहरी सिंचाई करनी चाहिएI चौथी सिंचाई फलियां बनते समय 70-75 दिन बाद तथा पांचवी सिंचाई दाना बनने के बाद दाना भरते समय की जाती है।

खरपतवार प्रबंधन

खरपतवार का भी नियंत्रण जरूरी होता हैI अच्छी पैदावार लेने के लिए निराई-गुडाई, खरपतवार निकलना बहुत ही आवश्यक हैI रसायनों द्वारा खरपतवार नियंत्रण के लिए पेंडीमिथिलिन 30 प्रतिशत की 3.3 लीटर या एलाक्लोर 50 प्रतिशत की चार लीटर मात्रा प्रति हैक्टेयर की दर से 800 से 1000 लीटर पानी में घोल कर फसल जमाव के पहले छिड़काव करें।
अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र के अध्यक्ष या वैज्ञानिकों से संपर्क करें।
डा संजय सिंह
वैज्ञानिक, फसल सुरक्षा

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