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पंकज हिंदी बुंदेली संस्था के द्वारा हुई काव्य गोष्ठी

by Shrinews24
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पंकज हिंदी बुंदेली संस्था के द्वारा हुई काव्य गोष्ठी

प्रदेशीय कवि रामरूप स्वर्णकार पंकज की जन्मोत्सव पर हुआ कार्यक्रम

कोरोना काल मे घटनाये घटीअजीब,किसी की खुली लाटरी,किसी का औंधे पड़ा नसीब

राहुल कुमार गुप्ता
दीपक यादव
कोच जालौन

कोंच नगर के मुहल्ला जयप्रकाश नगर स्थित मुरली मनोहर मन्दिर परिसर में पंकज हिंदी बुंदेली संस्था के तत्वाधान में कीर्ति शेष प्रदेशीय कवि रामरूप स्वर्णकार पंकज जी के जन्मोत्सब पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया इस काव्य गोष्ठी में मुख्य अतिथि नरोत्तम दास स्वर्णकार चातक विशिष्ट अतिथि नन्दराम स्वर्णकार भावुक मौजूद रहे कार्यक्रम की अध्यक्ष ता राजेश चन्द गोस्वामी ने की गोष्ठी की शुरुआत सरस्वती बन्दना से हुई जो साहित्यकार सन्तोष तिवारी सरल द्वारा पड़ी गई युवा साहित्कार पारस मणी अग्रवाल ने कहा “पत्र पड़ा होता तो बात बन जाती मेरे भेजें खतों से किताब बन जाती खोकर अपने होश को मेरी नींद उसकी याद बन जाती” सन्तोष तिवारी सरल ने कहा” शेर अच्छे हो तो दाद बनती है शोर अच्छे हो तो याद बन जाती है जो जीते है नगर और देश के लिये लोग अच्छे हो तो याद बन जाती है” वीरेन्द्र त्रिपाठी ने कहा” जिनको बचपन मे चलना हमने सिखाया मेला में था पीठ अपनी बिठाया, पीठ हमको वो बेटे दिखाने लगे है” मुन्ना यादव विजय ने पड़ा” मन के जीते जो टूट आशा न जाये, सावधानी से इन्हें भी तलाशा जाये” आशाराम मिश्रा ने कहा” सीताराम जी को प्यारी रजधानी लगे,मुझे सरजू जी को मीठो पानी लगे” आनंद शर्मा अखिल ने कहा” तिरा भरोसा कितना बमन करुं में तिरी नजर से देखी है ये दुनिया मेने” हास्य कवि ओंकार नाथ पाठक ओम ने कहा” कोरोना काल मे घटनाये घटी अजीब, किसी की खुली लाटरी किसी का औंधे पड़ा नसीब” ड़ा हरिमोहन गुप्त ने कहा” इंसानियत में टूटियेगा,में वही मिल जाऊंगा व्यर्थ मुझको खोजते हो आप अपने मजहबो में” राजेन्द सिंह रसिक ने कहा” जख्म सहलेंगे हंसकर यक़ीम कीजिये,शर्त ये है फिर न दवा दीजिये”नरोत्तमदास स्वर्णकार चातक ने पड़ा बे बोले-“दौड़ लगाने वाले अक्सर गिर जाते है, जो भी धीमी गति से चलते है मंजिल वह पाते है” ऋतू चतुर्वेदी ने कहा” कह रही आज दिल्लगी दोस्तों,ये गलत है बड़ी दिल जली दोस्तो” नंदराम स्वर्णकार भाबुक ने कहा-“इच्छाये अनावश्यक अगर अपनी बढ़ाओगे पिटारा बोक्ष का लेकर जहां भी आप जाओगे,लक्ष्य को साध कर चलना तो मंजिल पाही जाओगे” भास्कर सिंह माणिक ने कहा” इते उते की बांते करना छोड़ो, रीति नीति के पथ से नाता जोड़ो,आज नही तो कल यश तेरा होगा अपने मन को सदा राह पर मोड़ो” संजीव सरस् ने कहा” शांत रहते है सब्र से काम लेते है हम कुछ इस तरह से इंतकाम लेते है इस काव्य गोष्ठी में ड़ा मृदुल दांतरे सन्तोष राठौर आशीष गुप्ता राम कृष्ण वर्मा रोहित चतुर्वेदी दिलीप सोनी आचार्य जी मनोज जड़िया मंजुल मयंक स्वर्णकार संचालन भास्कर सिंह माणिक ने किया आभार संस्थापक ने आभार जताया है

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