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जो सुन नही सकता बोल नहीं सकता उसने कैसे धर्म परिवर्तन किया

by Shrinews24
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जो सुन नही सकता बोल नहीं सकता उसने कैसे धर्म परिवर्तन किया ये एक बड़ा सवाल है?जी हां मैं बात कर रहा हु मन्नू यादव की जो अब अब्दुल मन्नान बन चुका है।मन्नू यादव जो इसी साल अब्दुल मन्नान बन गया. मन्नू यादव के कन्वर्शन सर्टिफिकेट यानी धर्म परिवर्तन के प्रमाणपत्र को आप धर्म परिवर्तन के जेहाद का पहला सर्टिफिकेट भी कह सकते हैं.मन्नू यादव मूक बधिर है।मन्नू यादव के परिवार ने उसे नोएडा के एक मूक बधिर स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा था, लेकिन बाद में परिवार को पता चला कि इस स्कूल में पढ़ने वाला मन्नू यादव अब्दुल मन्नान बन चुका है. सोचिए एक व्यक्ति जो न बोल सकता है, न सुन सकता है, उसने अपने धर्म परिवर्तन का फैसला कैसे लिया होगा? ये धर्म परिवर्तन के जेहाद का नया मॉडल है, जिसे रोका जाना बेहद जरूरी है।मन्नू यादव जिसे इस्लाम कुबूल करने का सर्टिफिकेट मिला है इसमें लिखा है कि मन्नू यादव ने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म को स्वीकार किया है और अब से उसका नाम अब्दुल मन्नान हो गया है. बड़ी बात ये है कि इस पर काजी के हस्ताक्षर और Islamic Dawah Center की मुहर लगी हुई है और इसमें लिखा है कि ये प्रमाणपत्र जिले के SDM या नोटरी एफिडेविट के आधार पर जारी किया गया है।लेकिन इस सर्टिफिकेट में दो बातें समझने वाली हैं-पहली बात ये कि इसमें सर्टिफिकेट को जारी करने की तारीख 11 नवम्बर 2021 बताई गई है और ये तारीख एक नहीं दो-दो जगह लिखी है. अब सवाल है कि एक जगह तो गलती हो सकती है लेकिन दोनों जगह 11 नवम्बर लिखने के पीछे कोई षड्यंत्र तो नहीं था?और दूसरी बात ये कि इस सर्टिफिकेट में अब्दुल मन्नान के पिता राजीव यादव का गुरुग्राम का पता लिखा है, जबकि उसके पिता का कहना है कि उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं थी. यहां एक महत्वपूर्ण बात ये भी है कि जिस नोटरी एफिडेविट के आधार पर ये सर्टिफिकेट जारी हुआ है, उसमें भी गुरुग्राम का पता लिखा है, जबकि परिवार का कहना है कि किसी भी विभाग से कोई अधिकारी इस पते की जांच के लिए उनके घर नहीं पहुंचा.
एक नोटरी पब्लिक ऑफिसर का प्रमुख काम होता है, किसी भी दस्तावेज को प्रमाणित करना यानी ये बताना कि उसमें लिखी सभी बातें सबूतों और तथ्यों के आधार पर सही हैं या नहीं, लेकिन आरोप है कि इस मामले में ऐसा नहीं हुआ क्योंकि, इस एफिडेविट में जो पता लिखा है, वहां किसी ने जाकर कोई जांच ही नहीं की और मन्नू यादव के पिता को ये लगता रहा कि उनका बेटा नोएडा के मूक बधिरों के स्कूल में रह रहा है, जबकि इसी दौरान उनके बेटे का धर्म बदल दिया गया और वो मुसलमान बन गया.
इस नोटरी एफिडेविट में लिखी कुछ और बातें अहम हैं.इसमें लिखा है कि मन्नू यादव बिना किसी दबाव के और अपनी स्वेच्छा से इस्लाम धर्म को स्वीकार करता है और वो चाहता है कि उसे अब अब्दुल मन्नान के नाम से ही समाज, रिश्तेदार और दोस्तों के बीच जाना जाए. ये नोटरी एफिडेविट 11 जनवरी को अटेस्ट करवाया गया था और इस पर दिल्ली सरकार द्वारा नियुक्त नोटरी पब्लिक ऑफिसर का नाम फिरोज अहमद लिखा है.सोचिए मन्नू जो मूक बधिर है, जो न कुछ बोल सकता है, जो न सुन सकता है, सिर्फ साइन लैंग्वेज समझ सकता है और इसी में अपनी बात कर सकता है. ऐसे 22 साल के लड़के का धर्म परिवर्तन हुआ और एफिडेविट में लिखा है कि धर्म बदलने का इतना बड़ा फैसला उसने खुद ले लिया.
इस तरह के एफिडेविट से एक लीगल शील्ड बनाई गई है ताकि ये लोग मामला सामने आने पर बच सकें.अब इन लोगों ने जिस तरह से मन्नू यादव को अब्दुल मन्नान बनाया, ठीक उसी तरह से कई और मूक बधिरों का धर्म बदला और उन्हें मुसलमान बनाया और ये सारे लड़के इन लोगों को नोएडा की Deaf Society में मिले, जहां मूक बधिरों के लिए एक रेजिडेंशियल स्कूल है.ये बात तो आपको और हैरानी कर देगी कि नोएडा की इस Deaf Society में पहले भी कई छात्रों का धर्म परिवर्तन किया गया है और इसकी शिकायत 2019 में भी सामने आई थी और ये बात खुद इस Deaf Society की डायरेक्टर रुमा रोहा ने आज लखनऊ में ATS द्वारा की गई पूछताछ में मानी है.इसके अलावा ATS ने उनसे 2011 से अब तक के सभी बच्चों की जानकारी देने के लिए कहा है और ऐसी संभावना है कि पिछले 10 वर्षों में इस Deaf Society के जरिए हजारों छात्रों का धर्म बदला गया.
इस सोसायटी को लेकर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि, पुलिस ने अपनी FIR में जिस मूक बधिर छात्र आदित्य गुप्ता का जिक्र किया है, उसका धर्म भी इन लोगों ने बदलवाया था, लेकिन कल ये छात्र रहस्यमय तरीके से अपने घर कानपुर लौट आया और बताया कि नौकरी, मकान और शादी कराने का झांसा देकर इन लोगों ने इसका हिंदू से इस्लाम धर्म में परिवर्तन कराया और इस मामले में भी ठीक वैसा ही धर्म परिवर्तन का प्रमाणपत्र सामने आया है, जैसा मन्नू यादव का अभी हमने आपको बताया.
ये मामला बहुत गंभीर है और इसकी तह तक जाने पर पता चलता है कि इन लोगों ने दिल्ली के जामिया नगर में धर्म परिवर्तन कराने की दुकान खोली हुई थी और इसी को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में गिरफ्तार हुए लोगों के खिलाफ National Security Act 1980, गैंगस्टर एक्ट और इनकी सम्पत्ति जब्त करने के निर्देश दिए हैं।आपको बतादूँ कि किसी भी मामले में NSA के तहत तभी कार्रवाई होती है, जब सरकार को ये लगता हो कि कोई व्यक्ति उसे देश या राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कार्यों को करने से रोक रहा है और ये कानून संदिग्ध व्यक्ति की गिरफ्तारी करने का भी अधिकार सरकार को देता है और इसी से आप समझ सकते हैं कि ये मामला कितना गंभीर है।
हमारे भारतीय संविधान में धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार है।
कहने का मतलब ये है कि भारतीय संविधान धर्म परिवर्तन की बात नहीं करता लेकिन धर्म के प्रचार को लोकतांत्रिक मानता है और धर्म के प्रचार से ही लोग ये समझते हैं कि वो अपने धर्म को फैलाने के लिए स्वतंत्र हैं।
इस मामले में केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने भी सरकार का रुख स्पष्ट किया और कहा कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अब हम आपको ये बताते हैं कि भारत के पड़ोसी देशों में इसे लेकर क्या व्यवस्था है…..नेपाल में लोग अपनी स्वेच्छा से किसी भी धर्म को मान सकते हैं, लेकिन वो किसी का धर्म परिवर्तन नहीं करा सकते. अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है, तो ऐसे मामलों में तीन साल जेल की सज़ा का प्रावधान है।……म्यांमार में वर्ष 2015 में ही इसे लेकर चार कानून बने थे, जिनके तहत अगर वहां कोई व्यक्ति अपना धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो इसके लिए सरकार की अनुमति लेना जरूरी है और अगर कोई बौद्ध धर्म की लड़की किसी दूसरे धर्म के लड़के से शादी करती है तो उसके लिए नियम और भी कड़े हैं. ऐसे मामलों में सरकार पूरी जांच करती हैं और कई स्तर पर अनुमति लेनी पड़ती है.
….भूटान में जबरन और लालच देकर कराए गए धर्म परिवर्तन को लेकर राष्ट्रीय कानून है और कड़ी सजा का भी प्रावधान है…..
ग्रीस में भी धर्म परिवर्तन पर रोक है और वहां ग्रीस ऑर्थोडॉक्स चर्च के अलावा किसी और धर्म का प्रचार नहीं हो सकता।….
सोमालिया, सूडान और सऊदी अरब जैसे इस्लामिक देशों में भी इस्लाम धर्म को छोड़कर दूसरे धर्म को अपनाना गैर कानूनी है।..
मालदीव में तो अगर कोई मुस्लिम समुदाय का व्यक्ति अपना धर्म बदलता है तो उससे वो अपनी नागरिकता खो सकता है… अफगानिस्तान की एक अदालत ने एक व्यक्ति को इस्लाम धर्म छोड़ कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए मौत की सजा सुनाई थी…
इसके अलावा जॉर्डन, इजिप्ट और कुवैत में भी ऐसे ढेर सारे मामले हैं, जिनमें इस्लाम धर्म छोड़ने पर वहां लोगों को जेल जाना पड़ा।भारत मे भी अब ये मांग तेजी से बढ़ रही है कि एक राष्ट्रीय कानून लाकर इस पर अंकुश लगाया जाये।

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