Home उत्तर प्रदेश पलिया ब्लॉक में थारू जनजाति का तेजी से हो रहा ईसाईकरण

पलिया ब्लॉक में थारू जनजाति का तेजी से हो रहा ईसाईकरण

by Shrinews24
0 comment

पलिया ब्लॉक में थारू जनजाति का तेजी से हो रहा है ईसाईकरण।क्षेत्रीय प्रशासन और जिला प्रशासन इस गंभीर विषय पर चुप।आपको बतादें की बहुत जल्द हिन्दुविहीन होने की कगार पर है पलिया का थारू क्षेत्र।इस क्षेत्र से विलुप्त हो जाएगी थारू संस्कृति क्योकि इस क्षेत्र में हालात कुछ इसी स्थिति पर इशारा कर रहे है।समय समय पर इस विषय पर आवाज उठती रही है लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते इसपर नकेल नही कसी गई है।बेखौफ होकर धर्मांतरण कराया जा रहा है।आपको बतादें लगभग डेढ़ साल से लॉक डाउन का पूरा फायदा मिशनरियों द्वारा उठाया जा रहा है।चर्चा है कि अबतक दस चर्चों की स्थापना थारू क्षेत्र में हो चुकी है जबकि थारू क्षेत्र में इतने मन्दिर भी अबतक नहीं हैं।
थारू समाज के व्यक्तियों का ईसाई बनने का मुख्य कारण धन का लालच,अंधविश्वास व अशिक्षा आदि हैं।थारू क्षेत्र में तेजी ईसाई धर्म फैलने के पीछे तीन वजहों की चर्चा आमजनमानस में है।सूत्रों की माने तो भीरा का कैथोलिक चर्च जो समय समय पर थारू जनजाति के लोगों की धन की जरूरत पूरी करता है तो पलिया का सेनटेन्स स्कूल व कुछ अन्य मिशनरी के लोग जो थारुओं में अंधविश्वास को लेकर यीसु के प्रति विश्वास पैदा करते हैं।लोगो से चर्चा के दौरान पता चला कि ये लोग बुखार जुकाम, खांसी दर्द की अच्छी से अच्छी एलोपैथिक दवाई को पीसकर पुड़िया बना लेते हैं और उसके ऊपर यीसु का प्रसाद लिखकर बीमारी से संबंधित व्यक्ति को खिलाकर ठीक कर देते हैं और फिर यीसु का चमत्कार कहकर दिमाग का ब्रेनवाश करते हैं।और तीसरी वजह पलिया स्थिति एक समुदाय विशेष के कांग्रेस पार्टी के छुटभैया नेता जो किसी भी ईसाई बने थारू समाज के व्यक्तियों का कोई भी काम तहसील, थाना, ब्लॉक इत्यादि जगहों पर जाकर पूरा करवाते हैं।सन 1997 में थारू क्षेत्र के नझोटा गांव का थारू रामकिशन राना उस समय मात्र एक हजार लेकर भीरा जाकर ईसाई धर्म स्वीकार किया था और अबतक लगभग थारू क्षेत्र के 1100 परिवार ईसाई धर्म अपना चुके हैं और दस चर्चों की स्थापना हो चुकी है।ये चर्च कीरतपुर, सेड़ाबेड़ा,बजाही,पिपरौला, नझोटा,सुंडा,बिरिया,सोनाहा छिदिया पश्चिम।हमारे संवाददाता को नाम न बताने के आधार पर ये बताया गया कि ईसाई बने थारुओं को स्पष्ट निर्देश दिये जाते हैं कि वो अपने नाम के सामने राना या चौधरी ही लिखें ताकि अनुसूचित जनजाति की सुविधाओं को ले सकें।हमारे संवाददाता से अनेकों थारुओं से बात हुई जिसमें उन्होंने वीडियो बनाने और अपना नाम और पहचान बताने से साफ मना किया।उनकी मुजबानी अगर कहा जाए तो वो दिन दूर नही जब पलिया क्षेत्र के थारुओं की संस्कृति विलुप्त हो जाएगी।लोग विरोध करना चाहते है पर उन्हें डर है।क्षेत्र विशेष में इस तरह का घिनौना कार्य हो रहा है और हमारा क्षेत्रीय और जिला प्रशासन अनजान और आंख बंद किये हुए है।इस धर्मांतरण से सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है।प्रशासनिक अमले को इस पर संज्ञान लेना चाहिए ताकि इस तरह का अनैतिक और असंवैधानिक कृत्य रोक जा सके।

You may also like

Leave a Comment