Home उत्तर प्रदेश जनसंख्या नियंत्रण कानून पर मोदी सरकार की ना तो वहीं देश मे समय समय पर इसपर आवाज उठती रही

जनसंख्या नियंत्रण कानून पर मोदी सरकार की ना तो वहीं देश मे समय समय पर इसपर आवाज उठती रही

by Shrinews24
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जनसंख्या नियंत्रण कानून पर मोदी सरकार की ना तो वहीं देश मे समय समय पर इसपर आवाज उठती रही है और अब एक बार फिर ये आवाज मुखर हो रही है।देखते है जनसंख्या नियंत्रण पर नसबंदी कानून से लेकर अब तक का सफर।बढ़ते है मुद्दे पर
केंद्र की मोदी सरकार देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू नहीं करेगी। उसने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि वह देश के नागिरकों पर जबरन परिवार नियोजन थोपने के विचार का विरोधी है।देश में बढ़ती जनसंख्या के मद्देनजर इसे नियंत्रित करने के कानून की मांग समय-समय पर उठती रही है। देश का एक बड़ा वर्ग सामाजिक-शैक्षिक और आर्थिक पिछड़ेपन एवं धार्मिक वजहों से Family Planning का सहारा नहीं लेता है। इस कारण अपना परिवार एक-दो बच्चों तक सीमित रखने वाला दूसरा वर्ग उन लोगों को देश के संसाधनों पर बोझ की तरह मानता है जो अनगिनत बच्चे पैदा करते हैं।वहीं राजनीतिक जगत से भी जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की मांग उठती रही है। खासकर 2014 में बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार के केंद्र की सत्ता में आने के बाद से यह मांग जोर पकड़ने लगी। आइए जानते हैं कि जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने के समर्थन में आवाज कब-कब उठी और पूर्व की सरकारों में भी इसे लेकर कुछ फैसले हुए थे या नही………
1975 में आपातकाल के दौरान नागरिकों के अधिकार छीन लिए गए थे। इंदिरा गांधी की सरकार ने आपातकाल में जो फैसले लिए उनमें सबसे विवादास्पद फैसला था पुरुषों की जबरन नसबंदी का। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने पिछले दरवाजे से इस अभियान की कमान संभाली। उन्होंने नौकरशाहों को नसबंदी अभियान को सफल बनाने के लिए टारगेट दे दिया। उन्होंने नौकरशाहों को चेतावनी दी थी कि जिनका टारगेट पूरा नहीं होगा,उनके वेतन में कटौती की जाएगी या पूरा वेतन ही रोक दिया जाएगा। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, अभियान के एक साल में ही 62 लाख पुरुषों की जबरन नसबंदी करवा दी गई। नसबंदी के दौरान हुई लापरवाहियों के कारण दो हजार से ज्यादा पुरुषों की मौत भी हो गई।…….जनसंख्या नियंत्रण के लिए अटल बिहारी सरकार की ओर से गठित वेंकटचलैया आयोग ने कानून बनाने की सिफारिश की थी। इस आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएन वेंकटचलैया थे।….उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत पर ऑनलाइन पोल के जरिए लोगों की राय मांगी थी। इस पोल में भाग लेने वाले 80% से अधिक लोगों ने जनसंख्या नियंत्रण कानून की दरकार बताई थी।
…..भारतीय जनता पार्टी के नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने दिसंबर 2018 में पीएम नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्‍होंने बताया कि जनसंख्‍या विस्‍फोट पर रोक लगाने के लिए जनसंख्या नियंत्रण कानून पर संसद में बहस किए जाने की जरूरत बताई।……हिन्दू रक्षा सेना नाम के संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की मांग की थी।….केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, राजेंद्र अग्रवाल और स्वामी यतींद्रानंद गिरी की अगुवाई में मेरठ से दिल्ली की यात्रा की गई थी।
बीजेपी सांसद हरनाथ सिंह यादव ने राज्यसभा में जनसंख्या विस्फोटा का मुद्दा उठाया था।
बीजेपी के राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल अग्रवाल ने अगस्त 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर आगामी संसद सत्र में ही जनसंख्या नियंत्रण बिल लाने का आग्रह किया था।प्रधानमंत्री ने खुद भी 15 अगस्त 2019 को आपने लाल किले से देश को संबोधित करते हुए जनसंख्या नियंत्रण की बात कही थी। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले के प्राचीर से जनसंख्या नियंत्रण का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि जो छोटा परिवार रख रहे हैं, वह भी एक प्रकार से देशभक्ति कर रहे हैं। उन्होंने परिवार को दो बच्चों तक सीमित रखने की वकालत की थी।……कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद जो अब बीजेपी के हो चुके है ने भी पीएम मोदी की तरफ से जनसंख्या नियंत्रण का मुद्दा उठाए जाने का स्वागत किया था। बढ़ती हुई जनसंख्या देश के लिए मुसीबत बनती जा रही है।
जनसंख्या तेजी के साथ बढ़ रही है। इससे देश में भुखमरी, बेरोजगारी और भी अनेको समस्याएं भयंकर रूप लेती जा रही हैं। सीमित साधनों के कारण लूट, हत्याएं जैसे अपराध बढ़ रहे हैं। इन पर लगाम नहीं लगा तो भारत गृह युद्ध की विभीषिका देखने पर मजबूर होगा। इसलिए जनसंख्या विस्फोट को रोकने के लिए कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाया जाना बहुत जरूरी है।आइये देखते है जनसंख्या नियंत्रण किन किन राज्यो में है।आपको बता दु की देश के 11 राज्यों में आंशिक जनसंख्या नियंत्रण कानून प्रभावी है। वो राज्य हैं।महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में दो से अधिक बच्चे वालों को ग्राम पंचायत और नगरपालिका चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं। महाराष्ट्र सिविल सर्विसेज रूल्स, 2005 के तहत ऐसे व्यक्ति को राज्य सरकार में कोई पद नहीं दिए जाने का प्रावधान। दो से ज्यादा बच्चों वाली महिलाएं सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के फायदों से वंचित होंगी।…बिहार और उत्तरांखड में दो से अधिक बच्चे हैं तो नगरपालिका चुनाव लड़ने पर रोक।….असम में 1 जनवरी, 2021 से दो से अधिक बच्चों वाले माता-पिता को सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी।
….ओडिशा में दो से अधिक बच्चों वाले माता-पिता को शहरी निकायों के चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं है।…..मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में दो से अधिक बच्चों वाले को सरकारी नौकरियों और लोकल बॉडी के इलेक्शन लड़ने से रोक थी, लेकिन 2005 में फैसला पलट दिया गया। अब सरकारी नौकरियों और न्यायिक सेवाओं में ही टू चाइल्ड पॉलिसी लागू है।…..आंध्र प्रदेश और तेलंगान में पंचायती राज ऐक्ट में प्रावधान है कि दो से अधिक बच्चे हों तो पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।……गुजरात के लोकल अथॉरिटीज ऐक्ट में कहा गया है कि दो से अधिक बच्चों वाले पंचायत और नगरपालिका का चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।…..अब आइये देखते हैसंविधान में कौन-कौन से प्रावधान है…1976 में संविधान के 42वें संशोधन के तहत सातवीं अनुसूची की तीसरी सूची में जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन जोड़ा गया। इसके तहत केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन के लिए कानून बनाने का अधिकार दिया गया।इधर यूपी में योगी सरकार जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने जा रही है जिसका मसौदा तैयार किया जा रहा है।bjp समर्थकों की अगर बात की जय तो इसमें कोई दो राय नही है वो इस पर नियंत्रण चाहते है।जनसंख्या नियंत्रण भारत की इस वक्त की परिस्थितियों के आधार पर आवश्यक है खैर ये वक्त तैं करेगा कि देश मे केंद्रीय नेतृत्व इस विषय पर क्या निर्णय लेता है।

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