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कृषि विज्ञान केंद्र जमुनाबाद ने फसल सुरक्षा के बताए गुर

by Shrinews24
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कृषि विज्ञान केंद्र जमुनाबाद ने फसल सुरक्षा के बताए गुर

श्रीन्यूज़24
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कृषि विज्ञान केंद्र जमुनाबाद
लखीमपुर-खीरी
प्रसार निदेशालय, चन्द्र शेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर
प्रिय किसान भाईयों,
नमस्कार।।

कोरोना वायरस (कोविड-19)की तीव्रता को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें। टीकाकरण अवश्य करवाये,मास्क का प्रयोग करें तथा दो गज की दूरी बना कर रखें। आज मैं किसान भाइयों आपको परवल और धनियां की फसल में लगने वाले प्रमुख कीट और रोगों के बारे में विस्तृत जानकारी दूंगा।

परवल की फसल में लगने वाले कीट

फल मक्खी कीट

यह कीट कोमल अवयस्क फलों की त्वचा के नीचे अंडे देती है, जिससे यह गिटार निकलकर गोदे को खाकर फलों को सड़ा देती है। फल पीले पड़कर सड़ने लगते हैं।

प्रबंधन

कीट आने से पहले नीम तेल 1500 पीपीएम की 3 मिलीलीटर दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

यदि कीट आ गया है तो क्यूनोल फॉस 25 ईसी की 2 मिलीलीटर दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

गलन रोग

इस रोग का प्रकोप अविकसित फलों पर अधिक होता है, जिसके कारण पूरा फल सड़ कर गिर जाता है।

प्रबंधन

इस रोग के नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 50 डब्ल्यूपी की 3 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

खर्रा रोग

इसके प्रकोप से पत्तियों तथा फलों पर सफेद चूर्ण दिखाई देते हैं । परिणाम स्वरूप पत्तियां पीली पड़कर गिर जाती हैं।

प्रबंधन

इस रोग के नियंत्रण के लिए कसुगमायसिन्न 3% की 2 मिलीलीटर दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

धनिया की फसल में लगने वाले कीट

माहू कीट

यह कीट फूल आने के समय शिशु एवं प्रोन दोनों रस चूसकर नुकसान करते हैं प्रभावित फलों/ बीजों का आकार छोटा हो जाता है।

प्रबंधन

कीट आने से पहले नीम तेल 1500 पीपीएम की 3 मिली लीटर दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

यदि कीट आ गया है तो इमिडाक्लोप्रिड 17 एसएल की 10 मिलीलीटर दवा प्रति 15 लीटर पानी में घोल बनाकर तुरंत छिड़काव करें।

स्टेम गाल रोग

यह धनिया का प्रमुख रोग है । इसमें पत्तियों के ऊपरी भाग, तना, शाखाएं, फूल एवं फल पर रोग के लक्षण कुछ उभरे हुए फफोलो जैसे दिखाई देते हैं। आरंभ में रोग से संक्रमित तना पीला होने लगता है एवं मिट्टी के पास से तने पर छोटी गाल उभार लिए हुए भूरे रंग की होती है।

प्रबंधन

बीज को बोने से पूर्व थीरम 2.5 ग्राम दवा प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित कर लें।

पौधों के अवशेषों को नष्ट कर दें।

यदि रोग आ गया है तो कार्बेंडाजिम 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

उकठा रोग

इस रोग से प्रभावित पौधे शुरू में पीला पड़ने लगते हैं। कुछ ही दिनों में इनका शीर्ष मुरझा कर सूख जाता है और पौधा मर जाता है।

प्रबंधन

खेत की अप्रैल-मई में सिंचाई करके गर्मियों की गहरी जुताई करें और खाली छोड़ दें।

2 वर्ष का फसल चक्र अपनाए धनिया के स्थान पर अदरक या सरसों उगाए।

बुवाई से पहले और आखरी जुताई के साथ ट्राइकोडर्मा 4 से 5 किलोग्राम और गोबर की 50 से 60 किलोग्राम सड़ी हुई खाद मिलाकर 1 हेक्टेयर खेत में फैलाकर जुताई कराएं।

बुकनी रोग

इसे खर्रा रोग भी कहते हैं। इस रोग के कारण पत्तियों तथा तनों पर सफेदी आ जाती है तथा पत्तियां पीली पड़ जाती हैं।

प्रबंधन

इसके उपचार के लिए घुलनशील गंधक (सल्फैक्स) 3 किलोग्राम अथवा 600 मिलीलीटर डाई कूनो कैप प्रति हेक्टेयर की दर से 800 लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव करें।

अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, जमुनाबाद के अध्यक्ष या वैज्ञानिकों से संपर्क करें।
डा संजय सिंह
वैज्ञानिक, फसल सुरक्षा

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