Home उत्तर प्रदेश लखनऊ फलों के राजा आम पर भी महामारी की मार
बागवान से किए गए सरकारी वादे हवा हवाई ही रहे

लखनऊ फलों के राजा आम पर भी महामारी की मार
बागवान से किए गए सरकारी वादे हवा हवाई ही रहे

by Shrinews24
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लखनऊ फलों के राजा आम पर भी महामारी की मार
बागवान से किए गए सरकारी वादे हवा हवाई ही रहे

श्री न्यूज़ 24 व आदिति न्यूज़ एवं युटुब चैनल्स लखनऊ

प्रवीण सैनी लखनऊ

लखनऊ गर्मी जब परवान चढ़ती है तो फल के बाजार आम की खुशबू से महकने लगते है उत्तर भारत ही नहीं देश के दूसरे सूबों से भी आने वाले कई तरह के आम का चस्का लोगों को लगा रहता है
मगर फलों के राजा आम की किस्मों में दशहरी आम की मांग देश ही नहीं विदेशों में भी है और यह आम बड़े शौक से खाया जाता है
दशहरी आम की शुरुआत लखनऊ से 30 किलोमीटर पर स्थित काकोरी क्षेत्र के दशहरी गांव में लगे पेड़ से हुई थी और इस पेड़ को मदर ट्री दशहरी भी कहा जाता है जिसके चलते इस गांव का नाम दशहरी गांव रखा गया है
मगर कोरोना महामारी ने फलों के राजा आम पर भी नजर लगा दी है लॉकडाउन के बाद से मजदूर पलायन कर चुके हैं अब न तो ट्रक से आम उतारने वाले बचे हैं। और न ही मंडी से फल लेकर बाजार में बेचने वाले है
इसका सीधा असर बाजर में देखने को मिल रहा है
कोरोना के कारण राज्यों में लगते लॉकडाउन औऱ विदेश से भी फलों के राजा आम की मांग कम रहने के कारण आम की कीमत इस बार भी अन्य वर्षो की तुलना में कम मिलने की संभावना है
आम कारोबारी बताते हैं कि लॉकडाउन लगने से बागवानों के चेहरे की रौनक गायब हो गई है उत्तर प्रदेश का दशहरी आम अगले हफ्ते से तैयार होने लगेगा लेकिन इस पूरे फल पट्टी क्षेत्र में खरीदारों का टोटा पड़ा हुआ है। कच्चे दशहरी आम की तुड़ाई 21 मई से शुरू होगी और पाल में पकाने के बाद पहली जून से इसका बाजार सज जाएगा शौकीनों को जून के पहले हफ्ते में पाल और दूसरे हफ्ते से डाल का पका दशहरी आम खाने को मिलेगा मगर इस बार भी कारोबारियों के पास बाहर के ऑर्डर काफी कम हैं अबकी बार समय से पहले दशहरी के पेड़ों में बौर जोरदार आई थी और जल्द ही कीड़े लगने से खराब भी हो गई थी इसके अलावा आम में लासा भी लगे पिछले साल के मुकाबले इस साल आम की फसल भी कम हुई। जानकारों का कहना है कि इस बार फल 15 से 20 पर्सेंट है
इस बार फल पट्टी क्षेत्र में करीब एक चौथाई बाग बिके ही नहीं हैं। जिसकी वजह बागों में कम फल होना था लेकिन 75 फीसदी बाग पिछले साल का सीजन खत्म होते ही बिक गए थे। फल पट्टी क्षेत्र में बड़े कारोबारी बागवानों से पूरा बाग अग्रिम खरीद लेते हैं। बड़े बागों को तो कुछ पहले ही खरीदार मिल गए थे मगर छोटे बागों के लिए खरीदार आम तौर पर अप्रैल के महीने में आते हैं इस बार कोरोना की दूसरी लहर के कारण अप्रैल में खरीदार ही नहीं आये है
गौरतलब है कि पूरी दुनिया में आमों की 1500 से ज्यादा किस्में हैं जिनमें कई किस्मों का आम भारत में तैयार होता है। हर किस्म की अपनी अलग पहचान महक और स्वाद होता है। उनमें अल्फांसो आम सफेदा आम तोतापारी आम केसरआम दशहरीआम चौसा आम और लंगड़ा आम बेहद प्रचलित किस्म हैं जिन्हें बड़े शौक से खाया जाता है दशहरी आम मियागंज आसीवन औरास गंज मुरादाबाद मलिहाबाद में अधिकांश पाया जाता है बागवान कमल सिंह राठौड़ ने अपना दर्द समेटे हुए कहा कि सरकार ने कहा था हवाईपट्टी बनवा दूंगा विश्व प्रसिद्ध दशहरी आम एक्सपोर्ट हो जाएगा बागवान को अच्छी कीमत मिलेगी पर ऐसा हो ना सका। बागवान से किए गए सरकारी वादे सभ हवा-हवाई ही रहे उन्होंने कहा ले दे के सब आढ़तियों और व्यापारियों का हो जाता है किसान विचारा कई बार अपनी लागत को तरस जाता है

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