Home उत्तर प्रदेश पेट्रोल डीजल में चल रहा था खेल ,बाजी मार गया कडुआ तेल,,

पेट्रोल डीजल में चल रहा था खेल ,बाजी मार गया कडुआ तेल,,

by Shrinews24
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पेट्रोल डीजल में चल रहा था खेल ,बाजी मार गया कडुआ तेल,,

श्री न्यूज 24/ साप्ताहिक अदिति न्यूज़
ध्रुव ज्योति नन्दी, वाराणसी

वाराणसी : गजब की कहानी है जिंदगी को परिभाषित करने के लिए अलग- अलग तजुर्बों से अनुभव के शब्द को पीरों कर होने वाली सामायिक समस्या व सुखद पल के साथ व्यतीत क्षण ही जिंदगी की कहानी की हकीकत है कोरोना के महामारी ने जहां रिश्तो की सच्चाई और दुनिया को हिला कर रख दिया है वहीं दूसरी तरफ झूठी नातेदारी की भी जबरदस्त पोल खुली है व्यक्ति जीवन भर जिन बच्चों के लिए भरपूर मेहनत कर दो पैसे जुटाता है आज वही कंधे का सहारा जीवन की अंतिम विदाई के लिए भी तरस रहा है !
जहां सरकारी व्यवस्थाओं का जनाजा निकल चुका है वही मानव के अलग चरित्र जो जीवन के लिए अभिशाप और वरदान के रूप में दिखा ! कुछ समस्याएं इतनी विरल रही की दर्द भी कराह गया लेकिन उम्मीद की किरण ने जीवन में नई रोशनी के साथ दामन ना छोड़ने के लिए कशमकश जारी रहा….

ना कोई जरिया ना कोई इनकम फिर भी बढ़ती महंगाई बढ़ा रही है जीवन का गम…

एक कहावत कही गई थी कि सखी सैंया तो खूब ही कमात है महंगाई डायन खाए जात हैं यह वहीं दौर था जहां लोगों के कमाई का जरिया बरकरार थी फिर भी लोगों ने विरोध के लिए अपनी अलग अलग लोकतांत्रिक तरीका अपनाया आज महामारी के इस दुखद समय में रोजी रोजगार बंद पड़ा है इनकम का जरिया ना के बराबर है जहां लोग जीवन के कठिन समय में खुद को संभालने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं वही राजनीतिक चेहरा सिर्फ मोहरा की तरह नजर आया है वादे और इरादे दोनों के बीच के फासले बखूबी आम जनता के दिमाग में बैठ गई !
बड़े-बड़े समाज सेवी व नेता भी खुद को लाचार व असहाय महसूस कर रहे हैं जहां नियति ने रिश्तो को शर्मसार किया वही समय ने सबको सबका चेहरा दिखा दिया !
ज्यादातर लोग मध्यम वर्गीय जिनका प्रभावित होना लाजमी है सहारा ना सरकार हो रही है ना ही रिश्तेदार.. बस किसी तरह ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि यह दिन टल जाए और खाने कमाने के लिए किसी की दरवाजा या मुंह ना देखना पड़े..

खाने पीने का सामान का दाम आसमान छू रहा है सरकार इतनी लाचार है कि इन चीजों पर काबू पाने के बजाय बढ़ोतरी में ही तेजी दिखा रही है अब आलम यह है कि दाल भी अपनी चाल बनाए हुए हैं जहां लोगों को 70 से ₹80 किलो मिलता था वही आज रू140 का भी नहीं मिल रहा आपको बताते चलें डीजल पेट्रोल की बढ़ोतरी ने आम जीवन को बहुत प्रभावित किया दोनों की चाल के खेल में कड़वा तेल ने जबरदस्त बाजी मार ली है और ₹200 किलो पहुंचने के लिए बेकरार है फिर भी सरकार और सरकारी दावे यह कहते हैं कि सब ठीक-ठाक है ! यह कब तक चलेगा आम जिंदगी जिनकी मूलभूत आवश्यकता भोजन है उनकी रसोईया भी ठंडी पड़ रही हैं सरकार वैक्सीन और दवा के खेल में उलझी पड़ी है वही लूटपाट को अंजाम देने वाले अपने में मशगूल होकर सरपट दौड़ रहे हैं यह कैसी दौड़ है जहां जीवन सुरक्षा के बदले घर मकान गिरवी रखे जा रहे हैं जहां पेट पालने के लिए उधार लिए जा रहा है जहां सरकार से उम्मीद सिर्फ उम्मीद के साथ कल दिखाई दे रहा है..!

यह दौर भी चला जाएगा साथी तू सब्र कर
हर अंधेरी रात के बाद सूरज की किरण नई उजाला लेकर आएगा…!!

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