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फसलों के विभिन्न बीमारियों हेतु कृषि विज्ञान केंद्र जमुनाबाद ने जारी की एडवाइजरी

by Shrinews24
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फसलों के विभिन्न बीमारियों हेतु कृषि विज्ञान केंद्र जमुनाबाद ने जारी की एडवाइजरी

श्रीन्यूज़24
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कृषि विज्ञान केन्द्र जमुनाबाद
लखीमपुर-खीरी
किसान भाईयों
नमस्कार।।
वैश्विक महामारी कोरोना अपने चरम पर है उम्मीद है कि आप लोग कुशल पूर्वक से होंगे।इस महामारी से बचने का सिर्फ एक ही उपाय है टीकाकरण, मास्क व दो गज की दूरी जिसका पालन नितांत आवश्यक है। आज हम आपके साथ कद्दू वर्गीय सब्जियों मे रोग एवं कीट नियंत्रण पर चर्चा करेंगे। *रोग एवं नियंत्रण*

चूर्णिल आसिता (पाउडरी मिल्ड्यू)
 कद्दू वर्गीय सब्जियों में यह एक प्रकार की फफूदी से फैलने वाली बीमारी है, जिसका आक्रमण होने पर बेलों, पत्तियों, तथा तनों पर सफेद पर्ते चढ़ जाती हैं| इसकी रोकथाम के लिए कैरोथेन 0.1 प्रतिशत घोल एक ग्राम एक लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। बाविस्टीन 0.2 प्रतिशत के घोल से भी इस बीमारी की रोका जा सकता है। बीमारी की रोकथाम हेतु 10 से 12 दिनों के अन्तराल पर दो छिड़काव करें।

मृदुल आसिता (डाउनी मिल्ड्यू)
 कद्दू वर्गीय सब्जियों में इस बीमारी के प्रभाव से पत्तियों की निचली सतह पर भूरे रंग के धब्बे पड़ जाते हैं तथा इसके साथ-साथ पत्तियों पर भूरापन लिए हुए काले रंग की पर्ते चढ़ जाती हैं। यदि गर्मियों के मौसम में बरसात हो जाए तो यह बीमारी बहुत आम हो जाती है| इस बीमारी की रोकथाम के लिए डायथेन एम- 45 या रिडोमिल 2.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

फ्युजेरियम बिल्ट
कद्दू वर्गीय सब्जियों में इसकी रोकथाम के लिए कैप्टाफ 2.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर जड़ों में प्रयोग करें| फसल बदल-बदल कर बोएं, 3 साल का फसल चक्र अपनाएं।

वायरस की बीमारी

मोजैक 
यह विषाणु द्वारा होता है और इस रोग का फैलाव रस चूसने वाले कीटों द्वारा होता है| यह रोग बरसात वाली फसल में अधिक पाया जाता है| इस रोग की रोकथाम के लिए रोगग्रस्त पौधों की पहचान कर शीघ्रातिशीघ्र उखाड़कर गड्डे में दबा देना चाहिए| साफ खेत और खरपतवार नियंत्रण करके वायरस के संवाहक सफेद मक्खी एवं चेपा को नियंत्रण में रखा जा सकता हैं। कान्फीडोर (एमीडाक्लोरोपीड) 0.3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करके इस बीमारी को रोका जा सकता है। एन्थ्रेकनोज

यदि गर्मियों के मौसम में बरसात हो जाए तो यह बीमारी बहुत क्षति करती है| इस बीमारी में हल्के भूरे धब्बे पत्तियों में आते हैं, जो कि बाद में गहरे भूरे रंग में परिवर्तित होकर पूरे पौधों में फैल जाते हैं| इस बीमारी की रोकथाम के लिए डायथेन एम- 45 या बाविस्टीन का 2.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

कीट प्रकोप एवं नियंत्रण

लाल कद्दू भुंग ( रैड पम्पकिन बीटल)
 कद्दू वर्गीय सब्जियों में इस कीट के शिशु और वयस्क दोनों ही फसल को हानि पहुंचाते हैं| वयस्क कीट पौधों के पत्ते में टेढ़े-मेढे छेद करते हैं, जबकि शिशु पौधों की जड़ों, भूमिगत तने तथा भूमि से सटे फलों और पत्तों को नुकसान पहुंचाते हैं| *नियंत्रण*

1. कद्दू वर्गीय सब्जियों की फसल खत्म होने पर बेलों को खेत से हटाकर नष्ट कर दें।
2. कद्दू वर्गीय सब्जियों की अगेती बुवाई से कीट के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
3. संतरी रंग के भुंग को सुबह के समय इकट्ठा करके नष्ट कर दें।
4. कार्बारिल 50 डब्ल्यू पी, 2 ग्राम प्रति लीटर या एमामेक्टिन बैंजोएट 5 एस जी, 1 ग्राम प्रति 2 लीटर या इन्डोक्साकार्ब 14.5 एस सी, 1 मिलीलीटर प्रति 2 लीटर पानी का छिड़काव करें|
5. भूमिगत शिशुओं के लिए क्लोरपायरीफॉस 20 ई सी 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर हल्की सिंचाई के साथ इस्तेमाल करें।

फल मक्खी ( फुट फलाई)
कद्दू वर्गीय सब्जियों में इस कीट की मक्खी फलों में अंडे देती है और शिशु अंडे से निकलने के तुरंत बाद फल के गूदे को भीतर ही भीतर खाकर सुरंगें बना देते हैं।

नियंत्रण

1. खेत की निड़ाई करके प्युपा को नष्ट कर दें|
2. कद्दू वर्गीय सब्जियों के ग्रसित फलों को भी एकत्रित करके नष्ट कर दें|
3. मक्खियों को आकर्षित कर मारने के लिए मीठे जहर, जो मेलाथियान 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी एवं 1 प्रतिशत चीनी या गुड़ (25 ग्राम प्रति लीटर पानी से बनाया जा सकता है) को 50 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
फल मक्खी रात को मक्का के पौधों के पत्तों की निचली सतह पर विश्राम करती है, इसलिए कद्दू वर्गीय फसलों के खेत के पास मक्का लगाने और उस पर छिड़काव करने से इस कीट को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
4. कद्दू वर्गीय सब्जियों में फल मक्खी के नरों को आकर्षित करने के लिए ‘मिथाइल युजीनोल” पाश का प्रयोग भी किया जा सकता है|

सफेद मक्खी (व्हाइट फलाई)
 इस कीट के शिशुओं तथा वयस्कों के रस चूसने से पत्ते पीले पड़ जाते हैं| इनके मधुबिन्दु पर काली फफंद आने से पौधों की भोजन बनाने की क्षमता कम हो जाती है| *नियंत्रण*

1. इल्लियों को इकट्ठा करके नष्ट कर दें|
2. नीम बीज अर्क 5 प्रतिशत या बी टी 1 ग्राम प्रति लीटर या कार्बारिल 50 डब्ल्यू पी, 2 मिलीलीटर प्रति लीटर या स्पिनोसेड 45 एस सी 1 मिलीलीटर प्रति 4 लीटर पानी में छिड़काव करें।
3. रोकथाम के लिए एमिडाक्लोप्रिड 17. 8 एस एल 1 मिलीलीटर प्रति 3 लीटर या डाइमेथोएट 30 ई सी 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
चेपा (एफिड)
चेपा लगभग सभी कद्दू वर्गीय फसलों पर आक्रमण करते हैं| ये पौधों के कोमल भागों से रस चूसकर फसल को हानि पहुंचाते हैं। नियंत्रण

1. कद्दू वर्गीय सब्जियों में लेडी बर्ड भंग का संरक्षण करें।
2. कद्दू वर्गीय सब्जियों में नाइट्रोजन खाद का अधिक प्रयोग न करें।
3. इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस एल 1 मिलीलीटर प्रति 3 लीटर या डाइमेथोएट 30 ई सी, 2 मिलीलीटर लीटर या क्विनालफॉस 25 ई सी, 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें।
अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष से सम्पर्क करे।
डा संजय सिंह
वैज्ञानिक फसल सुरक्षा

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